Thursday, June 13, 2013


ये ठंडी पुरवाई ,
ये थमी सी शाम,
ये चुपके से झांकता, झिक्झिकता चाँद ,
ये बादलों की करवट लेता आसमान ,
ये बयान करता, इठलाता , रूठता एहसास,
कभी हाँ , कभी ना में हाँ, करते जवाब,
 ये जान के अनजान करती खिल्कारियां],
ये हम, ये तुम,
फिर ये मुस्कान ;) :)

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